Posted on 19-Sep-2026 06:11 PM

ऐतिहासिकता
सन् 1984 में भूगर्भ से भगवान पार्श्वनाथ की काले पाषाण की सप्तफण वाली 11' 3' की प्रतिमा । मिली है। यह अलौकिक देवरक्षित प्रतिमा 9वीं श.ई. की है। आन्ध्र प्रदेश के इस प्रथम तीर्थस्थल पर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा 10-16 मार्च 2003 में सम्पन्न हो चुकी है। अन्य जानकारी: | जैन पुरातात्विक सम्पदा आन्ध्रप्रदेश राज्य में फैली पड़ी है। मुख्यतः 40 स्थानों पर प्राप्त हुई हैं, जिनका उल्लेख आन्ध्रप्रदेश शासन में पुरातत्व निदेशक रहे डॉ. जी. जवाहरलाल ने अपनी अंग्रेजी पुस्तक 'जैन सेन्टर इन आन्ध्रप्रदेश में एवं जैन मान्यूमेंट इन आन्ध्रप्रदेश में किया है।
समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र -हैदराबाद-नलगोंडा-80 कि.मी. (08685-281696), बैंगलोर -300 कि.मी. श्रवणबेलगोला - व्हाया- बैंगलोर - 450 कि.मी.
अन्य जानकारी
श्री 1008 विघ्नहरण पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र मु.पो. - कुलचारम्, तह.-जोगीपेठ, जि.-मेदक (आन्ध्रप्रदेश) पिन - 502 381
टेलीफोन - प्रबंधक - किशोर पहाड़े - 08008436556, 09848054242
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 10 (बिना बाथरूम)- 10, हाल - 01 (यात्री क्षमता - 50), गेस्ट हाऊस - X प्रांगण - 2, प्रांगण में टेंट लगने पर 1000 यात्री ठहर सकते हैं।
रेल्वे स्टेशन - हैदराबाद या सिकन्दराबाद - 80 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - हैदराबाद बस स्टेण्ड अथवा बालानगर से बस द्वारा - 70 कि.मी.
संस्था - श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के अन्तर्गत
अध्यक्ष - श्री राजेश कुमार मांगीलाल जैन (पहाड़े) (09848054242)