Posted on 19-Sep-2026 06:17 PM

ऐतिहासिकता
8 वीं से 12 वीं शताब्दी तक 50 से अधिक प्रतिमायें भू-गर्भ से प्राप्त हुई। भगवान पद्मप्रभु की 8.5 फुट खड्गासन प्रतिमा को स्थानीय नागरिक भैरवनाथजी के नाम से पूजते हैं। इस स्थान की खोज सन् 1890 में अंग्रेजों ने की थी। पूर्व में 24 जिन मंदिर थे। जिनके भग्नावशेष मिलते हैं। तीन मंदिर पूर्ण अवस्था में विद्यमान हैं। यह क्षेत्र सराक बहुल है। सराकोद्धारक, राष्ट्रसंत उपाध्यायरत्न श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने इस सम्पूर्ण अंचल के पुनरुद्धार एवं विकास हेतु बहुत कार्य किया है एवं निरन्तर सराकोत्थान के कार्य चल रहे हैं।
8 वीं से 12 वीं शताब्दी तक प्राचीन जैन मूर्तियाँ निकट क्षेत्र लखाड़ा, भाष्करडांगा, बारहमसिया, शीतलपुर, अनाईजामाबाद, भांगड़ा में विराजमान हैं। श्री सम्मेद शिखर 180 कि.मी. बोकारो ईसरी बाजार से होते हुऐ।
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अन्य जानकारी
अतिशय क्षेत्र पाकबीरा (पुरुलिया) पश्चिम-बंगाल (W. Bengal)
श्री 1008 दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, पाकबीरा (पुरुलिया), ग्राम - पाकबीरा, तहसील - पुंचा, जिला - पुरुलिया (पश्चिम-बंगाल)
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 4, कमरे (बिना बाथरूम) - 4 हाल - 1
अन्य - पुरुलिया में 60 दिगम्बर जैन परिवार रहते है, जैन मंदिर एवं धर्मशाला भी है।
निकटतम प्रमुख नगर - पुरुलिया-55 कि.मी., पुंचा से-3 कि.मी., कोलकाता-320 कि.मी., बाकुड़ा-45 कि.मी.
संस्था - श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र प्रबन्धकारिणी समिति