Posted on 19-Sep-2026 06:16 PM

ऐतिहासिकता
भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा एवं अनेकों प्रतिमाओं का जमीन से निकलना इसी बात का संकेत है कि यहाँ प्राचीन समय में जैन संस्कृति का खजाना था। दिनांक 23.04.2013 को महावीर जयंती के दिन प्रतिमा निकली। भूगर्भ से प्राप्त भगवान मुनिसुव्रतनाथ की मनोहर मुद्रा देख कर लोग पलक झपकना भूल जाते है और भूगर्भ से निकलने के पश्चात अनेक अतिशय हुए उनमें कुछ प्रमुख अतिशय - (1) चार रंग परिवर्तन-नीला, हरा, स्लेटी, काला (2) नाभि में से ज्योति निकलना एवं नाभि स्पंदन (3) 26 जुलाई 2013 शनि अमावस को डेढ़ घंटे तक अभिषेक दायी आँख से रोशनी का निकलना 5 मिनिट तक इन अतिशय के साक्षी हजारों-लाखों लोग हैं।
अन्य जानकारी
श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र (स्वस्ति धाम) सन्मतिनगर, शाहपुरा रोड़, जहाजपुर, जिला-भीलवाड़ा-311201 (राज.)
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम)-5, aकमरे (बिना बाथरूम) - 10, हाल - 4(यात्री क्षमता -300),
रेल्वे स्टेशन - भीलवाड़ा-90 कि.मी., कोटा-100 कि.मी., जयपुर-180 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - सड़क व्हाया देवली और शाहपुरा
निकटतम प्रमुख नगर - भीलवाड़ा-90 कि.मी., कोटा -100 कि.मी.
संस्था - श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र (स्वस्तिधाम) समिति
कार्याध्यक्ष - श्री महावीरजी पौद्दार, जहाजपुर (09352503172)
क्षेत्र पर मन्दिरों की संख्या : निर्माण कार्य प्रगति पर है।