Posted on 19-Sep-2026 06:15 PM

ऐतिहासिकता
यह क्षेत्र सुरम्य पहाड़ी की तलहटी में बना हुआ है। यहाँ की प्रतिमाएं पूर्ण अतिशय युक्त हैं। मंदिर में चिन्तामणि भगवान पार्श्वनाथ की 9 फुट भव्य मनोहारी प्रतिमा है। जो 108 फणावली से उत्तुंग है। गणधराचार्य मुनि श्री कुन्थुसागर जी महाराज की प्रेरणा से नवोदित तीर्थ विकसित हुआ है।
अन्य जानकारी
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, कुन्थुगिरि, दहेमश्री नगर मु. पो.-आलते, हातकणंगले, रामलिंग रोड़,जि.-कोल्हापुर (महा.)
टेलीफोन - 0230-2487766,2487500 मो.: 09921741008, 09921791008
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 35, कमरे (बिना बाथरूम)-20 हाल - 1, (यात्री क्षमता-5000) गेस्ट हाऊस - 1
यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 1000. अन्य : 5000 यात्रियों (धर्मानुरागियों) के बैठने की क्षमता वाला प्रवचन हॉल, भव्य बॉटनीकल गार्डन, वृद्ध साधुओं के लिए भारत का एकमात्र विशिष्ट आश्रम
पहुँचने का सरलतम मार्ग - ट्रेन से मिरज, मिरज से क्षेत्र निकट है।
निकटतम प्रमुख नगर - इचलकरंजी - 15 कि.मी., सांगली - 22 कि.मी., कोल्हापुर-25 कि.मी.
संस्था - श्री गणाधिपति गणधराचार्य कुंथुसागर विद्या शोघ संस्थान
क्षेत्र पर पहाड़ : है। 7 कि.मी. का घुमावदार रास्ता है। वाहन ऊपर तक जाते है, कुल 11 मंदिर है, खड्गासन की 24 प्रतिमाएँ है।