श्री महावीर ब्रह्मचर्याश्रम (जैन गुरूकुल), कारंजा (लाड़) बिरवाड़ी, वाशिम (महाराष्ट्र)


Posted on 19-Sep-2026 06:15 PM


ऐतिहासिकता

प्राचीनकाल में यहाँ सेनगण, काष्ठासंघ व बलात्कारगण नामक तीन भट्टारक गद्दियाँ थी। सेनगण संबधित मन्दिर में भगवान पार्श्वनाथ की मूलनायक प्रतिमा के साथ 62 पाषाण व 49 धातु की प्रतिमाएँ हैं। काँच की नन्दीश्वर द्वीप की रचना बनी हुई है। काष्ठासंघ से संबंधित मन्दिर में मूलनायक चन्द्रप्रभु की पद्मासन प्रतिमा है, साथ ही लकड़ी का बना 42 स्तम्भ वाला दारूमण्डप दर्शनीय है। बलात्कारगण संबंधित मन्दिर में चन्द्रप्रभु की प्रतिमा वदो सहस्रकूट जिनालय हैं।

विशेष : यहाँ कंकुबाई जैन श्राविकाश्रम भी है। समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र मुक्तागिरि-115 कि.मी., भातकुली जैन - 75 कि.मी., शिरपुर अंतरिक्ष पार्श्वनाथ-85 कि.मी., वाढोणा (रामनाथ) - 25 कि.मी., दिग्रस - 45 कि.मी. अतिशय क्षेत्र हैं।

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अन्य जानकारी

श्री महावीर ब्रह्मचर्याश्रम (जैन गुरूकुल), कारंजा (लाड़) बिरवाड़ी - कांरजा (लाड़), जिला - वाशिम (महाराष्ट्र) पिन - 444105

आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 5, कमरे (बिना बाथरूम) - X

यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 100. भोजनशाला सशुल्क, अनुरोध पर

निकटतम प्रमुख नगर - वाशिम - 65 कि.मी., अमरावती - 65 कि.मी., अकोला - 72 कि.मी.

संस्था - श्री म.ब्र. आश्रम (जैन गुरुकुल), कारंजा (लाड़)

तीर्थ क्षेत्र : अतिशय क्षेत्र
पता : श्री महावीर ब्रह्मचर्याश्रम (जैन गुरूकुल), कारंजा (लाड़) बिरवाड़ी - कांरजा (लाड़), कारंजा (लाड़), वाशिम, महाराष्ट्र, 444105

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