Posted on 19-Sep-2026 06:14 PM

ऐतिहासिकता
यह अति प्राचीन अतिशय क्षेत्र है। विघ्न आने पर भक्तिभाव से घी का अभिषेक करने पर विघ्न दूर हो जाता है, ऐसी लोगों की श्रद्धा है। पद्मासन प्रतिमा के सिर पर सर्प लांछन न होकर पाद पीठ पर सर्प लांछन बना हुआ है। यह क्षेत्रकासार आष्टा' के नाम से जाना जाता है।
विशेष जानकारी : भगवान पार्श्वनाथ के केवलज्ञान कल्याणक पर प्रतिवर्ष तीर्थ पर चैत्रवदी चौथ का वार्षिक मेला लगता है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध-प्रदेश से तीर्थ यात्री आते हैं। बरसात में क्षेत्र दर्शनीय हो जाता है एवं महल के ऊपर से पानी गिरता है।
अन्य जानकारी
श्री विघ्नहर पार्श्वनाथ दि. जैन मन्दिर अतिशय क्षेत्र, आष्टा (कासार) तहसील - लोहारा, जिला - उस्मानाबाद (महाराष्ट्र)
आवास - कमरे - 6, त्यागी निवास - 1 (44' x 12'), हाल - 3 (यात्री क्षमता - 250) प्रवचन हॉल - 1 (60' x40') मंदिर में बिजली, कुँआ एवं बर्तन भी उपलब्ध हैं।
पहुँचने का सरलतम मार्ग - सोलापुर - हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 9 पर आष्टा मोड़ पर समस्त दिशाओं से आने-जाने वाली बसें रूकती हैं, वहाँ से 5 कि.मी. आष्टा गांव तक पक्की सड़क है।
निकटतम प्रमुख नगर - सोलापुर - 65 कि.मी., उस्मानाबाद जिला - 70 कि.मी., लातूर - 100 कि.मी.
संस्था - श्री विघ्नहर पार्श्वनाथ दि. जैन मन्दिर अतिशय क्षेत्र,आष्टा (कासार)
अध्यक्ष - श्री अरिंजय लीलाचन्द गांधी, अक्कलकोट (02181-220291)
मंत्री - श्री बाबूराव रंगनाथराव भस्मे, आष्टा (कासार) (02475-259015)