Posted on 07-Oct-2026 07:35 PM

मोहे बैल बनइयो तो बनइयो आदिनाथ को
मैं प्रथम जिनेश्वर को शीश झुकाऊंगा ।
मोहे हाथी बनइयो तो बनइयो अजितनाथ को
मैं धर्मध्वजा को नभ में लहराऊंगा।
मोहे घोड़ा बनइयो तो बनइयो संभवनाथ को
मैं दौड़ दौड़ प्रभु का संदेश पहुंचाऊंगा।
मोहे वानर बनइयो तो बनइयो अभिनंदन को
मैं कूद कूद जिनवर महिमा सुनाऊंगा।
मोहे चकवा बनइयो तो बनइयो सुमति नाथ को
मैं मधुर स्वर में गा कर मन हर्षाउंगा।
मोहे कमल बनइयो तो बनइयो पद्म प्रभु को
मैं खिल खिल सुगंध लुटाऊंगा।
मोहे स्वस्तिक बनइयो तो बनइयो सुपार्श्वनाथ को
मैं चार गति बताकर मोक्ष दिखलाऊंगा।
मोहे चंदा बनइयो तो बनइयो चंद्र प्रभु को
मैं शीतल किरणों से महिमा चमकाऊंगा।
मोहे मगर बनइयो तो बनइयो पुष्पदंत को
मैं गहराई में रहकर प्रभु का ध्यान लगाऊंगा।
मोहे कल्पवृक्ष बनइयो तो बनइयो शीतलनाथ को
मैं तपते मन को शांति दिलाऊंगा।
मोहे गैंडा बनइयो तो बनइयो श्रेयांश नाथ को
मैं जिनवाणी का संदेश सुनाऊंगा।
मोहे भैंसा बनइयो तो बनइयो वासुपूज्य को
मैं विनय भाव से चरणों में शीश झुकाऊंगा।
मोहे शूकर बनइयो तो बनइयो विमलनाथ को
मैं निर्मलता का पाठ जगत को पढ़ाऊंगा।
मोहे सेही बनइयो तो बनइयो अनंत नाथ को
मैं काटों में रहकर भी प्रभु मार्ग निभाऊंगा।
मोहे वज्रदंड बनइयो तो बनइयो धर्मनाथ को
मैं अटल धर्म से जीवन सजाऊंगा।
मोहे हिरण बनइयो तो बनइयो शांति नाथ को
मैं शांति का संदेश जगत में फैलाऊंगा।
मोहे बकरा बनइयो तो बनइयो कुंथुनाथ को
मैं जिन चरणों में शीश झुकाऊंगा।
मोहे मीन बनइयो तो बनइयो अरहनाथ को
मैं भव सागर से पार ले जाऊंगा।
मोहे कलश बनइयो तो बनइयो मल्लीनाथ को
मैं मंगल जल अभिषेक कराऊंगा।
मोहे कछुआ बनइयो तो बनइयो मुनिसुव्रत को
मैं संयम का पाठ जगत को सिखाऊंगा।
मोहे नील कमल बनइयो तो बनइयो नमीनाथ को
मैं भक्ति पुष्प वन अर्पित हो जाऊंगा।
मोहे शंख बनइयो तो बनइयो नेमीनाथ को
मैं प्रभु की ध्वनि दूर तक पहुंचाऊंगा।
मोहे सर्प बनइयो तो बनइयो पार्श्वनाथ को
मैं फण फैलाकर रक्षा कर जाऊंगा।
मोहे सिंह बनइयो तो बनइयो महावीर को
मैं चरणों में दहाड़ प्रेम की लगाऊंगा।
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