Posted on 29-Oct-2026 08:52 PM

१ णमो जिणाणं
अर्थ - ऐसे ऋद्धिधारी मुनिराज जिन्हें जिनसंज्ञा प्राप्त है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
२ णमो ओहि जिणाणं
अर्थ - ऐसे ऋद्धिधारी मुनिराज जिन्हें अवधि ज्ञान प्राप्त है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
३ णमो परमोहि जिणाणं
अर्थ - ऐसे ऋद्धिधारी मुनिराज जिन्हें परम अवधि ज्ञान प्राप्त है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
४ णमो सव्वोहि जिणाणं
अर्थ - ऐसे ऋद्धिधारी मुनिराज जो सर्वावधि ज्ञान के धारी है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
५ णमो अणंतोहि जिणाणं
अर्थ - ऐसे ऋद्धिधारी मुनिराज जिन्हें असंख्यात योजन की बात स्पष्ट हो जाती है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
६ णमो कोट्ठ-बुद्धीणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिनकी बुद्धि कोष्ठ के समान हो उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
७ णमो बीज बुद्धीणं
अर्थ - ऐसे ऋद्धिधारी मुनिराज जिनकी बुद्धि बीज के समान महान है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
८ णमो पदाणुसारीणं
अर्थ - ऐसे मुनि जिनके एक पद पढ़कर द्वादशांग का ज्ञान हो जाता है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
९ णमो संभिण्ण-सोदाराणं
अर्थ - जो ऋषि संख्यात योजन तक के सभी जीवों का उत्तर दे सकते है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
१० णमो सयं बुद्धाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिनकी प्रज्ञा ही श्रमणों में प्रधान है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
११ णमो पत्तेय बुद्धाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जो प्रत्येक बुद्धि रिद्धि के धारी है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
१२ णमो बोहिय बुद्धाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जो बोधि बुद्धि के धारी है उन्हें मेरा प्रणाम होवे ।
१३ णमो उजु मदीणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिन्हें ऋजुमति मन पर्यय ज्ञान है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
१४ णमो विउल मदीणं
अर्थ - ऐसे ऋद्धिधारी मुनि जिन्हें विपुल मति मन पर्यय ज्ञान हो उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
१५ णमो दस पूव्वीणं
अर्थ - ऐसे ऋद्धिधारी मुनिराज जिन्हें दस पूर्व का ज्ञान है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
१६ णमो चउदसपूव्वीणं
अर्थ - ऐसे ऋद्धिधारी मुनिराज जिन्हें चौदह पूर्व का ज्ञान है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
१७ णमो अट्ठंगमहाणिमित्त कुसलाणं
अर्थ - ऐसे ऋद्धिधारी मुनि जिन्हें आठ निमित्तो का श्रेष्ठ ज्ञान है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
१८ णमो विउव्वइड्डि-पत्ताणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जो वाद विवाद में कुशल है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
१९ णमो विज्जाहराणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिन्हें विद्याएं प्राप्ति हो उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
२० णमो चारणाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिन्हें चारण ऋद्धियां प्राप्त हो उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
२१ णमो पण्णसमणाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिन्हें सम्यक प्रज्ञा प्राप्त हुई है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
२२ णमो आगास-गामीणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिन्हें आकाशगामी ऋद्धि प्राप्त है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
२३ णमो आसी-विसाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिनके शब्द साकार हो जाते है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
२४ णमो दिट्ठि-विसाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जो दृष्टि से ही विष का नाश कर देते है उन्हें मेरा प्रणाम होवे ।
२५ णमो उग्ग-तवाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जो उग्र तपश्चरण करते है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
२६ णमो दित्त - तवाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिनकी शरीर की कान्ति सूर्य सम बढ़ती हो उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
२७ णमो तत्त-तवाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिनके शरीर में भोजन, मल मूत्र नहीं बनता उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
२८ णमो महा-तवाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जो मासौपवासी है उन्हें मेरा प्रणाम होवे ।
२९ णमोघोर-तवाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जो घोर तपस्वी है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
३० णमो घोर-गुणाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जो उत्कृष्ट गुणों के धारी है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
३१ णमो घोर परक्कमाणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जो घोर गुण और पराक्रम में श्रेष्ठ है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
३२ णमो घोर-गुण-बंभयारीणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिनके होते चोरी, युद्ध आदि बाधाएं नहीं होती उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
३३ णमो आमोसहि पत्ताणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिनके चरण छूने से ही रोग ठीक हो जाते है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
३४ णमो खेल्लोसहि पत्ताणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिनकी लार, थूक, नासिका, मल औषधि है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
३५ णमो जल्लोसहि पत्ताणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिनका पसीना रोग नाशक है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
३६ णमो विप्पोसहि पत्ताणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिनके शरीर के अवशिष्ट पदार्थ ही औषधि है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
३७ णमो सव्वोसहि पत्ताणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जिनके नख रोम आदि औषधि है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
३८ णमो मण - बलीणं
अर्थ - जो मनोबल ऋद्धि के धारी है ऐसे मुनिवर को मेरा प्रणाम होवे।
३९ णमो वचि-बलीणं
अर्थ - ऐसे ऋषिराज जो वच बली ऋद्धि के धारी है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
४० णमो काय-बलीणं
अर्थ - ऐसे ऋषि जो कायबलि महा ऋद्धि के धारी है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
४१ णमो खीर-सवीणं
अर्थ - ऐसे महा मुनिराज जिनके हाथ का रुखा भोजन दूध जैसा हो जाता है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
४२ णमो सप्पि-सवीणं
अर्थ - ऐसे मुनिराज जिनके हाथ पर रुखा भोजन भी घी युक्त हो जाता है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
४३ णमो महुर सवीणं
अर्थ - ऐसे मुनिराज जिनके हाथ पर आया रुखा भोजन मधुर रसयुक्त हो जाता है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
४४ णमो अमिय-सवीणं
अर्थ - ऐसे मुनिराज जिनको रुखा भोजन हाथ में देने पर अमृत समान हो जाता है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
४५ णमो अक्खीण महाणसाणं
अर्थ - ऐसे मुनिराज जो जहां पर आहार करे उस घर का भोजन उस दिन समाप्त ना हो उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
४६ णमो वड्ढमाणाणं
अर्थ - ऐसे महा मुनिराज जिनका ज्ञान बढ़ता हुआ है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
४७ णमो सिद्धायदणाणं
अर्थ - ऐसे महा मुनिराज जिनका ज्ञान सिद्धि दायी है उन्हें मेरा प्रणाम होवे।
४८ णमो भयवदो-महदि-महावीर-वड्ढमाणाणं बुद्ध-रिसीणं
अर्थ - सभी सच्चे साधुओं को मेरा हमेशा हमेशा प्रणाम होवे।
Reference: https://youtu.be/XqFOZ-d_b1M?si=J6HWw7W0VsVo4zvj
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