Posted on 19-Sep-2026 06:12 PM

ऐतिहासिकता
रट्ट राजवंश के राजाओं द्वारा निर्मित भगवान पार्श्वनाथ की ध्यानमग्न पद्मासन प्रतिमा 4 फीट ऊँची 1100 वर्ष प्राचीन, अति सुन्दर एवं मनोहारी हैं। देखने वालों को ऐसा प्रतीत होता है कि साक्षात तीर्थकर मौन व्रत धारण कर तपस्या में जीवंत बैठे हुए हैं। सन् 1989 में आचार्य श्री श्रुतसागरजी मुनि महाराजजी ने भगवान की प्रतिमाजी को गुफा के ऊपरी भाग में प्रतिष्ठापित करवाया। प्रतिमा की महिमा बहुत है। आज भी अनेक अतिशयकारी घटनायें देखने को मिलती है।
अन्य जानकारी
श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान दि. जैन अतिशय क्षेत्र, कमठाण त. एवं जिला - बीदर (कर्नाटक) पिन - 585 226
टेलीफोन - 08482-229524, 220295, मो. : 098803 95004, 09845334456
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - X, कमरे (बिना बाथरूम) - 12, हाल - 2 (यात्री क्षमता - 200+300), गेस्ट हाऊस - X यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 200+300 = 500
भोजनशाला - नि:शुल्क, अनुरोध पर, आधुनिक सुविधा से युक्त
रेल्वे स्टेशन - बीदर - 9 कि.मी. बिदर जिला केन्द्र स्थान है।
बस स्टेण्ड पहुँचने का सरलतम मार्ग - कमठाण - 1/2 कि.मी. रेल अथवा सड़क मार्ग, मुम्बई - हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग क्र.9- 19 कि.मी. की दूरी पर है।
नोट : बीदर जैन मंदिर में भी ठहरने के लिए कमरों की व्यवस्था है एवं 100 व्यक्तियों के ठहरने की एक हॉल की व्यवस्था है।
संस्था - श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान दि. जैन अतिशय क्षेत्र, कमठाण ट्रस्ट