Posted on 19-Sep-2026 06:12 PM

ऐतिहासिकता
पायशेट्टि और जायशेट्टि श्रावकों के उपचार से बीजापुर बादशाह की बीमार बेगम के ठीक होने से बादशाह ने जिनमन्दिर निर्माण की अनुमति दी। दोनों श्रावकों को स्वप्न में वल्मीक से ध्वनि सुनाई दी। खोदने पर मूर्ति खंडित अवस्था में मिली। पुन: स्वप्न पाकर मूर्ति निकाली तो अखंडित मूर्ति प्राप्त हुई। वही मूर्ति (श्री नवखंड पाश्र्वनाथ भगवान) दर्शन के लिये उपलब्ध है। यहाँ क्षेत्रपाल ब्रह्मदेव भी श्रद्धा के स्रोत हैं। हाई-वे के नजदीक ही पार्श्वनाथ जैन गुरुकुल है एवं इसमें ठहरने की व्यवस्था भी है।
समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र - कुम्भोज बाहुबली - 60 कि.मी., कोथली - 26 कि.मी., कसमलगी - 140 कि.मी.
अन्य जानकारी
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, स्तवनिधी (तवंदी) ता. चिक्कोड़ी, जिला - बेलगाँव (कर्नाटक) पिन - 591237
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - ४, कमरे (बिना बाथरूम) - 36 हाल - 4, गेस्ट हाऊस - 3 यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 600.
रेल्वे स्टेशन - कोल्हापुर - 47 कि.मी., बेलगाँव - 70 कि.मी,
बसस्टेण्ड पहुँचने का सरलतम मार्ग - निपाणी -7 कि.मी. सड़क मार्ग, कोल्हापुर से 47 कि.मी. राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 4
निकटतम प्रमुख नगर - कोल्हापुर - 47 कि.मी., इचलकरंजी - 48 कि.मी.
संस्था - दक्षिण भारत जैन सभा की श्री क्षेत्र कमेटी, स्तवनिधि
मंत्री - प्रा. विलास आ. उपाध्ये (08338-221964, 09739039559)