Posted on 19-Sep-2026 06:17 PM

ऐतिहासिकता
श्री पंचायती बड़े मंदिर जी में एवं छोटे मंदिर जी में अंग्रेजों के शासन काल में किले के अन्दर स्थित अक्षयवट के पास से प्राप्त लगभग 30 प्राचीन जिन प्रतिमाएं मध्य कालीन नोंवी- दशमी शताब्दी की विराजमान हैं। एक अत्यन्त प्राचीन मनोज्ञ जिन बिम्ब खड़गासन लगभग तीन फुट अवगाहना की सन् 2002 में नगर के चौक एरिया से भूगर्भ से प्राप्त हुई है। चार बड़े मन्दिर एवं चार छोटे मन्दिर लगभग 150 से 400 वर्ष पुराने हैं। केवल ज्ञान की प्राप्ति भी यहीं हुई है। दो कल्याणक तीर्थ होने का सौभाग्य प्रयाग को प्राप्त हुआ है। युग के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की प्रथम देशना यहाँ होने से आदि तीर्थ है।
विशेष जानकारी - यह गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम पर बसा नगर है। एवं हिन्दुओं का तीर्थराज है। यह शिक्षा, संस्कृति का प्रमुख केन्द्र है। आनन्द भवन, संग्रहालय, संगम एवं उच्च न्यायालय दर्शनीय है।
तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली - 13 कि.मी., भगवान पद्मप्रभु के चार कल्याणक वाला क्षेत्र प्रभासगिरि (कौशाम्बी) -65 कि.मी.
अन्य जानकारी
श्री भगवान ऋषभदेव ज्ञानस्थली तीर्थ, प्रयाग 56/62, चाहचन्द, जीरो रोड़, इलाहाबाद (उ.प्र.) पिन - 211 003
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 20, कमरे (बिना बाथरूम) - 26, हाल - 3 (यात्री क्षमता - 300)
बस स्टेण्ड - इलाहाबाद - जीरोरोड़ - 500 मीटर की दूरी पर
पहुँचने का सरलतम मार्ग - दिल्ली, हावड़ा, मुम्बई, चेन्नई से सीधी रेल सेवा उपलब्ध है।
संस्था - श्री दि. जैन पंचायती सभा, प्रयाग - इलाहाबाद
मंत्री - श्री अनूपचन्द जैन (0532 - 2423839, 094501 15615)