Posted on 19-Sep-2026 06:14 PM

ऐतिहासिकता
नर्मदा ओर कावेरी नदियों का संगमस्थल सिद्धवरकूट एक सिद्धक्षेत्र है। यहाँ से दो चक्रवर्ती, दस कामदेव व साढे तीन करोड़ मुनि मोक्ष गये हैं। भट्टारक महेन्द्रकीर्तिजी ने सं. 1935 में स्वप्न पाकर खोज की तो उन्हें चन्द्रप्रभु भगवान की मूर्ति सं. 1545 कीव आदिनाथ भगवान की मूर्ति प्राप्त हुई एवं विशाल मंदिर दृष्टिगोचर हुआ। जीर्णोद्धार पश्चात् सं. 1951 में प्रतिष्ठा द्वारा यह क्षेत्र प्रकाश में आया। मान्धाता में भी धर्मशाला है। यहाँ फाल्गुन सुदी 15 व एकम चैत्र वदी 1 को एवं होली पर मेला लगता है। तीन दिवसीय भव्य आयोजन बाहुबली स्वामी का महामस्तकाभिषेक।
अन्य जानकारी
श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र, सिद्धवरकूट पोस्ट - मान्धाता, ओंकारेश्वर, जिला-खंडवा (मध्यप्रदेश)
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 20, कमरे (बिना बाथरूम) - 10 हाल - 4, (यात्री क्षमता - 200) गेस्ट हाऊस - 2 ए.सी. कमरे - 10, डीलक्स कमरे - 8 यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 500.
रेल्वे स्टेशन - ओंकारेश्वर रोड़ (मोरटक्का) - 12 कि.मी.
बस स्टेण्ड - ओंकारेश्वर - 2 कि.मी., बड़वाह - 18 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - बड़वाह से जीप, कार, बस द्वारा सड़क मार्ग
निकटतम प्रमुख नगर - बड़वाह - 18 कि.मी., सनावद - 18 कि.मी.
संस्था - श्री दि. जैन सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट प्रबन्धकारिणी कमेटी
अध्यक्ष - श्री प्रदीपकुमार सिंह कासलीवाल, इन्दौर (9893030218)