Posted on 19-Sep-2026 06:17 PM

ऐतिहासिकता
श्री प्रभासगिरि क्षेत्र तीर्थंकर पद्मप्रभु की तप एवं ज्ञान कल्याणक भूमि है। गंगा-यमुना नदी के बीच दोआब् में एकमात्र पहाड़ी है। यहाँ से ललितघट आदि 32 जैन मुनियों की जल समाधि हुई थी। समीप ही कौशाम्बीभगवान पद्मप्रभु के गर्भवजन्म कल्याणक की भूमि है।
अन्य जानकारी
श्री पद्मप्रभु दिगम्बर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र, श्री प्रभासगिरि (पभौसा), पोस्ट - गोराजू, जिला - कौशाम्बी (इलाहाबाद), (उत्तरप्रदेश), पिन - 212214
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - 29 , कमरे (बिना बाथरूम) - 26, हाल - 4 (यात्री क्षमता - 400), गेस्ट हाऊस - 2
रेल्वे स्टेशन - भरवारी - 35 कि.मी. (इलाहाबाद-कानपुर मेन लाइन पर)
बस स्टेण्ड - कौशाम्बी बस स्टेण्ड इलाहाबाद से 50 कि.मी.
पहुँचने का सरलतम मार्ग - व्हाया इलाहाबाद/कानपुर । इलाहाबाद - कौशाम्बी बस स्टेण्ड से प्रति घण्टे बस जाती हैं। गिराज (3 कि.मी.) से क्षेत्र के लिये स्थानीय सवारी मिलती है। कानपुर से 140 कि.मी. सैनी मोड़ से सिराथू, ओसा, टेवा, पूरब शरीरा होते हुए 40 कि.मी. पड़ता है।
निकटतम प्रमुख नगर - इलाहाबाद -65 कि.मी., चित्रकूट -50 कि.मी., कानपुर-180 कि.मी.
संस्था - श्री पद्मप्रभु दि. जैन अतिशय तीर्थक्षेत्र कमेटी श्री प्रभाषगिरि (कौशाम्बी)
क्षेत्र पर पहाड़ - है। 200 सीढ़ियाँ है एवं 2 मंदिर तथा पद्मप्रभु भगवान की चरण पादुका है। डोली की व्यवस्था है।