जैन ज्ञान (प्रश्न-उत्तर)



 

प्रश्न 1. जैनाचार्यो के अनुसार देवदर्शन करने का कितना फल बताया है?

 

उत्तर - जैनाचार्यो के अनुसार -

देवदर्शन का मात्र विचार से - 2 उपवास का फल

देवदर्शन की तैयारी करने से - 3 उपवास का फल

आरम्भ करने से - 4 उपवास का फल

घर से दर्शन हेतु निकलने - 5 उपवास का फल

कुछ दूर पहुँचने पर  - 15 उपवास का फल

मंदिर व घर के बीच पहुँचने से - 30 उपवास का फल

मंदिर के दर्शन से  - 6 माह उपवास का फल

वेदी की तीन परिक्रमा करने से  - 1वर्ष का उपवास

जिन प्रतिमा का मुखावलोकन करने से - 1करोड़ उपवास का फल मिलता है।

 

प्रश्न 2. जल छानकर क्यों पीना चाहिए?

 

उत्तर - जैनाचार्यों के अनुसार अनछने जल में असंख्यात जीव होते हैं अत: जीव रक्षा एवं स्वास्थ्य की दृष्टि को ध्यान में रखकर जल छानकर पीना चाहिए। वैज्ञानिकों ने भी एक बूंद अनछने पानी में 36450 जीव बताये है।

 

प्रश्न 3. जैन धर्म के अनुसार छने पानी की क्या मर्यादा है?

 

उत्तर - जैन धर्म के अनुसार छने पानी की 48 मिनट व लौंग इलायची सौंफ आदि मिले पानी की 6 घंटे व उबले हुए पानी की 24 घंटे की मर्यादा है।

 

प्रश्न 4. रात्रि भोजन क्यों नहीं करना चाहिए ? 

 

उत्तर - रात्रि भोजन करने से स्वास्थ्य बिगड़ता है, अपाचन होता है, प्रमाद व हिंसा होती है इसलिए रात्रि भोजन नहीं करना चाहिए।

 

प्रश्न 5. रात्रि में भोजन करना किसके समान व पानी पीना किसके समान है?

 

उत्तर - रात्रि में भोजन करना माँस खाने व पानी पीना खून पीने के समान है। (मार्कण्डेय पुराण के अनुसार)।

 

प्रश्न 6. जैन को भोजन कब करना चाहिये?

 

उत्तर - जैन को सूर्योदय के 48 मिनट बाद व सूर्यास्त के 48 मिनट पूर्व तक भोजन कर लेना चाहिए।

 

प्रश्न 7. जिनेंद्र भगवान को नमस्कार किस आसन से करना चाहिए?

 

उत्तर - नमस्कार पंचांग व अष्टांग से करना चाहिए तथा गवासन से करना चाहिए। गवासन के नमस्कार को सर्वोत्तम माना गया है, खड़े-खड़े दर्शन नहीं करना चाहिए अविनय होता है।

 

प्रश्न 8.अष्टांग कौन-कौन से हैं?

 

उत्तर - दो हाथ, दो पैर, मस्तक, पेट, पीठ, छाती।

 

प्रश्न 9. देव शास्त्र गुरू के सामने कितने पुंज चढ़ाकर दर्शन करना चाहिए?

 

उत्तर - जिनेंद्र देव के सामने  - 5 पुंज चढ़ाकर

जिवाणी के सामने  -  4 पुंज चढ़ाकर

व गुरू महाराज के सामने -  3 पुंज चढ़ाकर दर्शन करना चाहिए।

 

प्रश्न 10.श्रावक किसे कहते हैं?

 

उत्तर - जो जैन कुलाचार का पालन करता है और जो अष्ट द्रव्य से प्रतिदिन पूजन करता है उसे श्रावक कहते हैं।