Posted on 19-Sep-2026 06:13 PM

ऐतिहासिकता
इस क्षेत्र पर अतिशयकारी चौबीसी जिन बिम्ब विद्यमान हैं। 10 वीं शताब्दी का दिगम्बर जैन मन्दिर दो पहाड़ियों के मध्य कला का अद्भुत नमूना है। वज्रमठमन्दिर भी उच्च कलाकोटि का जैन मन्दिर है। नगर के भीतर बाहर अनेक पुरावशेष बिखरे पड़े हैं। किंवदन्ती है कि राजा श्रीपाल का कुष्ठ रोग यहाँ के मानसरोवर तालाब से दूर हुआ था। कुछ विद्वानों के अनुसार यह क्षेत्र भगवान शीतलनाथ की तपोभूमि और दो कल्याणक क्षेत्र है। भगवान पाश्र्वनाथ की खड्गासन 4 फुट 9 इंच की प्रतिमा है। लगभग 50 वर्ष पूर्व किन्हीं अज्ञात कारण से प्रतिमा में से पसीना निकला था। जो हवन शुद्धि पर बंद हुआ।
समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र - विदिशा (उदयगिरि की गुफाएँ)- 37 कि.मी., भोपाल - 93 कि.मी.
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अन्य जानकारी
श्री 1008 दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र चौबीसी मन्दिर, ग्यारसपुर ग्राम/तहसील - ग्यारसपुर, जिला - विदिशा (मध्यप्रदेश) पिन - 464 331
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - निर्माणाधीन,कमरे (बिना बाथरूम)-2 हाल - 1(यात्री क्षमता - 15), गेस्ट हाउस - शासकीय यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 25.
औषधालय - है (वैद्य दीपचन्द जैन द्वारा संचालित धर्मार्थ)
पहुँचने का सरलतम मार्ग - बस द्वारा विदिशा - सागर सड़क मार्ग पर स्थित विदिशा - 37 कि.मी., सागर - 80 कि.मी.,
संस्था - दि. जैन अतिशय क्षेत्र चौबीसी मन्दिर कमेटी, ग्यारसपुर
क्षेत्र पर पहाड़ : है माला देवी (सीधी चढ़ाई हैं)। 1 कि.मी. वाहन पहाड़ पर जाते है।