Posted on 19-Sep-2026 06:14 PM

ऐतिहासिकता
यहाँ एक ही परकोटे में अतिशययुक्त 28 भव्य जिनालय हैं। मूलनायक भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ एवं अरहनाथजी की दिव्य प्रतिमाओं सहित अनेक कलात्मक मूर्तियाँ हैं। 11 वीं, 12 वीं एवं 13 वीं शताब्दी में निर्मित ये मन्दिर श्रेष्ठ पाड़ाशाह की देन हैं। मन्दिरजी में विराजित सभी प्रतिमाएँ देशी पाषाण के हीरे के पालिश युक्त हैं जिनमें आज के ग्रेनाइट से भी ज्यादा चमक है। मेला एवं विमानोत्सव प्रतिवर्ष चैत्र बदी नवमी को होता है। गोलाकोट व पचराई की व्यवस्था एक ही ट्रस्ट के आधीन है।
अन्य जानकारी : खनियांधाना में भव्य नन्दीश्वर मंदिर एवं 3 जैन मंदिर दर्शनीय है।
समीपवर्ती तीर्थक्षेत्र - खनियांधाना-20 कि.मी., गोलाकोट-28 कि.मी., चंदेरी(खन्दारजी)- 70 कि.मी., थूबोनजी - 105 कि.मी., सेरोनजी - 90 कि.मी., पवाजी - 85 कि.मी.,
अन्य जानकारी
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, पचराईजी, अंतर्गत - श्री शांतिनाथ चौरासी दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट कार्यालय खनियांधाना, जिला - शिवपुरी (मध्यप्रदेश) पिन - 473990
आवास - कमरे (अटैच बाथरूम) - उपलब्ध है, कमरे (बिना बाथरूम)-7 हाल - 1 (यात्री क्षमता - 70), गेस्ट हाउस -४ यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 200.
भोजनशाला - नहीं (श्री नंदीश्वर जिन मंदिर खनियांधाना में सुविधा है)
रेल्वे स्टेशन - बसई - 60 कि.मी.(झाँसी-ललितपुर के मध्य)
पहुँचने का सरलतम मार्ग - सड़क मार्ग व्हाया खनियांधाना 20 कि.मी. अथवा अशोकनगर-60 कि.मी. खनियांधाम एवं ईसागढ़ - कदवाया होकर निकटतम प्रमुख नगर खनियांधाना - 20 कि.मी., अशोक नगर - 62 कि.मी.
संस्था - श्री शांतिनाथ चौरासी दि. जैन मंदिर ट्रस्ट, खनियांधाना